उत्तराखंड, गणेश, राजनीति और पौराणिक कथाएं।

by | May 7, 2026

उत्तराखंड की राजनीति में समय समय पर पौराणिक लोक कथाओं से मिलते जुलते उदाहरण सामने आते रहते हैं।

हालिया प्रकरण भी बड़ा ही दिलचस्प है। कांग्रेस के गणेश को घेरने के लिए एक चक्रव्यू का पर्दाफाश हुआ है। जिसमें षड्यंत्रकारी असुरों के नाम सामने आ रहे हैं।
भगवान गणेश जी महाराज के समय भी एक सिंदुरासुर नाम का राक्षस था । स्त्री और पुरुष दोनों ही भेष में रहता था। खूब सिंदूर लगाता था या लगाती थी…। बड़ी बिंदी , बड़ी बड़ी आँखें, लाल काले दांत। हालांकि उस समय रजनीगंधा जैसा गुटखा तो नहीं होता होगा लेकिन उसी से मिलता जुलता कोई तम्बाकू जरूर रहा होगा। जो उसकी दंत कथा को बतलाता था। बड़ा ही बड़बोला राक्षस था। सभी देव गणों ,मानव गणों के बारे में कुछ न कुछ बोलता रहता था। ये राक्षस और राक्षसी दोनों स्वरूपों में मौजूद रहकर ,समाज में भ्रम पैदा करता था। कालांतर में जिसका वध गणेश जी के हाथों हुआ।

उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से जुड़ी खबर समाचार चैनलों के माध्यम से प्राप्त हुई तो ज्ञात हुआ कि उनको हटाने का बड़ा षड्यंत्र चल रहा था । कुछ लोगों का इसमें पर्दाफाश भी हुआ है।

भले ही मैं अलग राजनीतिक विचारधारा से हूं। निर्दलीय जनता का विधायक हूं। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद से आजतक गणेश गोदियाल को जो मैंने देखा है वो पहाड़ का सीधा साधा लाटा मनखी (आदमी) है। एकदम पाकसाफ। जो है मुंह के सामने है। न कोई लाग ,न कोई लपेट…। न कोई छल न कोई कपट। जैसा कि पहाड़ का हर कोई व्यक्ति है सिवाय सिंदूरासुर राक्षसो के।

गणेश गोदियाल को लोग पहाड़ का लाल कहते हैं… इसमें कोई दोराय नहीं है। वो इस काबिल हैं भी।
मुझे अच्छी तरह याद है नारायण दत्त तिवाड़ी सरकार में भी जब सब लोग लाल बत्तियों और कैबिनेट मंत्री की होड़ में थे तब गणेश गोदियाल पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कोई पद की डिमांड शायद ही कभी की हो जबकि वो निशंक जैसे नेता को हराकर विधायक बने थे।

2012 में भी बद्री केदार मंदिर समिति का अक्ष्यक्ष भी उन्हें हाथ जोड़कर बनवाया गया चूंकि उस वक्त इस पद के लिया कोई काबिल व्यक्ति मिला ही नहीं।

गणेश गोदियाल वास्तव में गाड़ गदेरों के आदमी हैं । काफल ,हिसोल, बुरांश और जल ,जंगल ,जमीन से जुड़े व्यक्तित्व हैं।

पिछले कुछ दिनों से उन्हें सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा ट्रोल किया जा रहा था। उनके ऊपर अर्नगल आरोप लगाए जा रहे थे वो भी पांच दस लाख रुपए लेने जैसे छोटे आरोप। जबकि गणेश गोदियाल खुद पहाड़ का एक ऐसा बेटा है जिसने मुंबई जैसे बड़े महानगर में खुद को साबित करते हुए अपना व्यवसाय शुरू किया।

भले ही राजनीतिक रूप से मेरे उनसे मतभेद हों लेकिन सार्वजनिक रूप में होते हुए इतना जरूर कहूंगा कि गणेश गोदियाल पहाड़ का सच्चा लाल है।

अब पुनः बड़ी बिंदी , लाल काले दांतों वाली राक्षसी की कथा का अंत करते हुए इतना ही कहूंगा कि राक्षसों का सदैव विनाश ही हुआ है और सत्य की सदैव विजय ही हुई है।