महाभारत के युद्ध में शिखंडी की भूमिका तो आप सबको ज्ञात ही होगी। किसी की ढाल बनकर ,वार करने का शिखंडी सबसे बड़ा उदाहरण है।
शिखंडीयो से वीर योद्धा न कभी लड़े थे ,न कभी लड़ेंगे। क्योंकि उनका स्तर वो नहीं है। योद्धाओं को वीरगति प्राप्त होना मंजूर होता है पर शिखंडीयों से लड़ना बिल्कुल नहीं।
वर्तमान समय तक पहुंचते पहुंचते उत्तराखंड की राजनीति में शिखंडीयों की भूमिका पर प्रकाश डालना भी आवश्यक है।
समय समय पर आपको भी ऐसे शिखंडी उत्तराखंड में जरूर दिखाई दे रहे होंगे।
उत्तराखंड की राजनीति के कई तथाकथित पुरोधाओ ने शिखंडी हायर कर लिए हैं।इन शिखंडीयों को बकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें सिखाया जा रहा है कि कब कहां ,किसके लिए ढाल बनना है? कब किस के साथ छल करना है? कब किसके खिलाफ भ्रम पैदा करना है?
आज की राजनीति के इस महाभारत के युद्ध में इन शिखंडीयों को आगे करके ,नेता जी छुप छुपकर युद्ध का मजा लेना चाहते हैं।
लगता है इन तथाकथित पुरोधाओं का पुरुषत्व खत्म हो गया है। जो इन्हें शिखंडीयों की आवश्यकता पड़ रही है।
पर सनद रहे यही शिखंडी एक दिन भस्मासुर बनकर तुम्हे भस्म कर देंगे। तब तुम किसी भी काबिल नहीं रहोगे।
याद रखना इतिहास हमेशा वीर योद्धाओं का ही लिखा जाता है । शिखंडीयों पर सिर्फ कहावतें बना करती हैं ।

