हरीश रावत जी, टी-शर्ट का रंग बदला या राजनीति का ढंग?
मंगलौर में बदलाव की बात करने पहुंचे हरदा, लेकिन पुराने रिश्तों और राजनीतिक विरासत पर भी उठ गए सवाल!
हरीश रावत जी, आज आपकी टी-शर्ट का रंग देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। अब यह रंग मौसम के हिसाब से बदला था, राजनीतिक मौसम के हिसाब से या फिर किसी नई रणनीति का संकेत था, यह तो आप ही बेहतर बता सकते हैं! वैसे तो आप रंग बदलने में गिरगिट से भी आगे हो। लेकिन आज आपकी टी-शर्ट देखकर मन में एक सवाल जरूर आया कि आखिर हरदा के मन में चल क्या रहा है?
अब पता नहीं ईडी है, सीबीआई है या कोई दूसरी जांच एजेंसी। देश में एजेंसियां भी बहुत हैं और राजनीति में चर्चाएं भी। किसके यहां क्या हुआ, किसकी जांच चल रही है और किसके मन में क्या डर है, यह तो भगवान ही जाने!
लेकिन हरदा, आपकी मंगलौर यात्रा ने कुछ पुराने किस्से जरूर याद दिला दिए।
जिस मंगलौर में राजनीति सीखी, वहीं की विरासत को चुनौती? हरदा, जिन हरिद्वार के मुसलमानों ने आपको सिरमौर बनाया, आपको सांसद बनाया , आपकी बेटी को विधायक बनाया , आपको विधायक बनाकर मुख्यमंत्री बनाया, आज आप उनकी विरासत पर ही हमला बोलने निकल पड़े ? और याद करोगे 2024 में आपके बेटे वीरेंद्र को 550000 लाख वोट दिया , इस वोट में 70% वोट मुस्लिम था बूथ उठाकर देख लेना , लेकिन आपके कल के बयान “मंगलौर मांगे बदलाव” आपकी राजनीति के ताबूत में आखिरी कील ठोंक गया, अब आप इसका प्रभाव ग्रामीण सीट पर भी देखना।
हरीश रावत जी, आप मंगलौर में बदलाव की बात करने गए थे।
हरदा, काजी साहब के दौर की राजनीति, पुराने रिश्ते और उनके परिवार से आपके संबंधों की चर्चा आज भी होती है। क़ाज़ी मोईनुद्दीन साहब ने आपको राजनीति सिखाई थी आज उन्ही के बेटे की राजनीतिक हत्या की बात करते हो।
हरदा, राजनीति में विरोध करना आपका अधिकार है, लेकिन पुराने रिश्तों का हिसाब भी कभी-कभी जनता मांग लेती है।
आपके राजनीतिक सफर को देखकर एक पुरानी कहावत याद आती है—
हरदा जिसके कंधे पर हाथ रख दें, वह छह महीने बाद अपना कंधा जरूर टटोलता है कि यह हाथ आशीर्वाद देने के लिए रखा गया था या राजनीति का कोई नया अध्याय लिखने के लिए! पांच विधायक, बेटी का साथ और फिर भी शक्ति प्रदर्शन पर सवाल! हरदा आपको लगा था आप आओगे हजारों को भीड़ होगी सैकड़ो गाड़िया होंगी, लेकिन निकला टें टें फुस्स। और ये भीड़ भी उनके द्वारा लायी गई थी जिन्हें आपने टिकट का झूठा वादा किया हुआ है।
हरीश रावत जी, आप उत्तराखंड की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। आपने अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी भी देखी है और विपक्ष की राजनीति भी। लेकिन आपकी राजनीति की एक दिलचस्प बात है। जब भी लगता है कि हरदा अब कुछ दिन आराम करेंगे, तभी आप कोई नई राजनीतिक यात्रा, नया कार्यक्रम या नया शक्ति प्रदर्शन लेकर सामने आ जाते हैं।
कभी दिल्ली, कभी देहरादून, कभी हरिद्वार और अब मंगलौर! लगता है हरदा ने तय कर लिया है कि राजनीति में भले ही कुछ भी बदल जाए, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बने रहने का प्रयास नहीं बदलना चाहिए।
हरदा आपके लिए कहा जाता, आपने जिसके कंधे पर हाथ रखा उसे कई महीनों बाद पता चलता है उसके कंधे पर जख्म हो गया।
हरदा, आपके धोखेबाज़ होने के कुछ किस्से सुनाना चाहता हूँ।
आपकी समस्या है आप वन मैंन आर्मी बनना चाहते हो। एकाधिकार चाहते हो। आप कभी किसी को मगरमच्छ कहते हो ,कभी उज्याडु बल्द कहते हो । आपने तो पूरी कॉंग्रेस को ही उजाड़ दिया।
वहीं पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर ने भी आपके लिए गजब का ट्वीट किया था हरीश रावत जी ।।
अमरिंदर ने कहा था-आप जो बोते हो ,वही काटते हो। ऑल द बेस्ट!!
आपके लिए एक बात और कही जाती है, जहाँ-जहाँ पड़त पाँव संतान के वहाँ-वहाँ बंटाधार।
असम का प्रभारी बनाया तो असम कांग्रेस ख़त्म।
पंजाब का प्रभारी बनाया तो वहाँ कांग्रेस ख़त्म।
आपने किशोर उपाध्याय को टिहरी से सहसपुर लाकर पटक दिया और उसके सामने हटवाने के लिए फिर एक मुसलमान का कंधा इस्तेमाल किया और उसे निर्दलीय लड़वा दिया। ये किशोर उपाध्याय वही जिसका इस्तेमाल आपने तिवारी सरकार में पाँच साल तिवारी जी को परेशान करने के लिए और जब राज्यसभा की बात आई तो लात मारकर हटा दिया और किसी और को बना दिया।
आप खुद क्या हो बांदर (बंदर) ?? जो कभी दूसरे से छीनकर खाता है ,
जैसे विजय बहुगुणा से सीएम की कुर्सी छीनी !!
कभी अपने ही साथियों को काटने के लिए दौड़ता है जैसे 2016 में ,जब कॉंग्रेस के सारे बड़े चेहरे छोड़कर चले गए। हरीश रावत जी कहीं आपकी स्थिति कुछ समय बाद यकुलु बांदर (अकेले बंदर) जैसी न हो जाय।
जैस ही उत्तराखंड कांग्रेस ने पाँच भाजपा के बड़े नेता दिल्ली कांग्रेस में शामिल किए आपको चूल उठ गई कि मेरे बिना कैसे हुआ , आपको लगा कांग्रेस कैसे मजबूत हो रही है राज्य में। आप कभी कांग्रेस के हितैषी थे ही नहीं , इस प्रदेश की कांग्रेस का बेड़ा गर्क करने वाले ही आप।
प्रीतम को कैसे उसकी सीट पर हरवा दूँ, काजी को कैसे हरवा दूँ, फलानी पार्टी या निर्दलीय व्यक्ति को कैसे कांग्रेस की सीट पर जितवा दूँ ताकि कांग्रेस को कम पड़े तो मुझे सीएम बनाने के लिए समर्थन दे दे । पूरा प्रदेश जानता हाई आप कितने बड़े साज़िश करने वाले नेता हूँ। आज आपसे बर्दाश्त नहीं हो रहा कि प्रीतम सिंह जी , गणेश गोदियाल जी और हरक सिंह जी के साथ पूरी कांग्रेस मिलकर कैसे उत्तराखंड कांग्रेस को मजबूत करने में लगे है, तुरंत 15 दिन के वनवास की घोषणा कर दी , पर इस से किसी पर फर्क नहीं पड़ा, काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, ये प्रपंच भी आपने उभरती कांग्रेस को कमजोर करने के लिए रचा था लेकिन इस बार किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज विपक्ष के तौर पर कांग्रेस दिखने लगी वरना आप तो बीजेपी की गोद में बैठे थे। होली पर आपका रूप-रंग सब देख लेते है । हरदा, कांग्रेस को कमजोर करने के लिए आप को साजिशें करते हो

