शहजाद पूनावाला: RISE हुआ या FALL?

by | Sep 29, 2026

शहजाद पूनावाला: राष्ट्रीय प्रवक्ता की कुर्सी से रियलिटी शो के फर्श तक!

राजनीति में आदमी का सफर ऊपर की तरफ भी जाता है और नीचे की तरफ भी। लेकिन शहजाद पूनावाला का सफर शायद भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प “Rise and Fall” में से एक बनता जा रहा है।

कभी कांग्रेस से जुड़े। फिर कांग्रेस के नेतृत्व और आंतरिक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उससे अलग हुए। इसके बाद भाजपा में पहुंचे और धीरे-धीरे पार्टी के सबसे चर्चित टीवी चेहरों में शामिल हो गए। राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर टीवी स्टूडियो में उनकी तेज आवाज, आक्रामक बहस और राजनीतिक विरोधियों पर हमले उनकी पहचान बन गए। अगस्त 2026 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से भी इस्तीफा दे दिया।

दिलचस्प पारिवारिक तस्वीर भी रही। उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला राजनीतिक टिप्पणीकार हैं और लंबे समय से कांग्रेस के समर्थन वाले रुख के लिए जाने जाते रहे हैं। एक दौर में टीवी पर दोनों भाइयों को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की पैरवी करते देखना अपने आप में चर्चा का विषय था। (NDTV India⁠)

लेकिन अब सवाल राजनीति का नहीं, राजनीतिक व्यक्तित्व की दिशा का है।

राष्ट्रीय राजनीति की प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्राइम-टाइम डिबेट और देश के बड़े राजनीतिक मुद्दों पर बोलने वाला व्यक्ति अचानक एक रियलिटी शो “Rise and Fall 2” में प्रतियोगी बनकर पहुंच जाता है।

और विडंबना देखिए—शो का नाम भी “Rise and Fall” है।

फिर वही हुआ जिसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी।

बहस हुई, मामला बढ़ा और सह-प्रतियोगी Siwet Tomar ने शहजाद की तरफ आक्रामक तरीके से बढ़ते हुए उन्हें धक्का दिया। वे जमीन पर गिरे, उन्हें कपड़ों से पकड़कर खींचे जाने और कपड़े फटने के दृश्य सामने आए। इसके बाद शहजाद ने कैमरे के सामने शो छोड़ने की इच्छा भी जताई।

यहां एक बात बिल्कुल स्पष्ट रहनी चाहिए—किसी व्यक्ति के साथ शारीरिक हिंसा को राजनीतिक असहमति या मनोरंजन के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। शहजाद से कितनी भी वैचारिक असहमति क्यों न हो, उनके साथ मारपीट गलत है।

लेकिन शहजाद पूनावाला से एक दूसरा सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए।

शहजाद साहब, आखिर आप जाना कहां चाहते हैं?

कांग्रेस से भाजपा।
भाजपा से इस्तीफा।
राष्ट्रीय राजनीति से रियलिटी शो।

और वहां राजनीतिक तर्कों की जगह गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और फटा हुआ कुर्ता!

क्या यही उस राजनीतिक यात्रा की मंजिल थी जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने के दावे के साथ हुई थी?

एक राष्ट्रीय राजनीतिक प्रवक्ता का पद केवल टीवी स्क्रीन पर दिखाई देने का माध्यम नहीं होता। वह एक विचारधारा, संगठन और करोड़ों समर्थकों के सामने जिम्मेदारी का पद होता है।

इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि कोई राजनेता रियलिटी शो में क्यों गया। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपना पेशा और मंच चुनने की स्वतंत्रता है।

प्रश्न है—आप अपने सार्वजनिक व्यक्तित्व को किस दिशा में ले जा रहे हैं?

कल तक जिस व्यक्ति को दर्शक देश की राजनीति पर बहस करते देखते थे, आज वही व्यक्ति एक मनोरंजन कार्यक्रम में दूसरे प्रतियोगी के साथ झगड़े के कारण सुर्खियों में है।

यह प्रसिद्धि तो हो सकती है।

लेकिन क्या यह राजनीतिक प्रासंगिकता है?

और शायद यही शहजाद पूनावाला के लिए सबसे असहज सवाल है।

क्योंकि टीवी पर दिखाई देना और राजनीति में महत्वपूर्ण होना—दो बिल्कुल अलग चीजें हैं।

“Rise and Fall” में जाना उनका व्यक्तिगत निर्णय था। लेकिन इस घटना ने उनके सामने उनके अपने सार्वजनिक जीवन का आईना जरूर रख दिया है।

कभी कांग्रेस के गलियारों में पहचान बनाने की कोशिश।
फिर भाजपा के राष्ट्रीय मंच पर आक्रामक प्रवक्ता की भूमिका।
और अब रियलिटी शो के फर्श पर पड़ा वही राष्ट्रीय चेहरा।

शहजाद साहब, राजनीति में विरोधी से बहस जीतना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह तय करना है कि आदमी जिस सीढ़ी से ऊपर चढ़ा है, उसे छोड़कर आखिर किस मंच पर खड़ा होना चाहता है।

शो का नाम “Rise and Fall” है।

बाकी फैसला दर्शक करें—
वे इसमें Rise देख रहे हैं या Fall।